-- विभाष कुमार झा
राज्य सरकार ने विकास के लिए अब तक जो भी प्रयास किये हैं, उनमें विकेंद्री कारण की दस्तक हमेशा सुनाई दी है. इसी कड़ी में नौ नए जिलों क़ा गठन भी एक क्रांतिकारी कदम साबित होगा. विकास के लिए छोटे से छोटे इलाके को भी अपने प्रशासन के नजदीक पहुँचने क़ा अह्साद दिलाना बहुत बड़ा फैसला है.
सरकार के स्तर पर बार बार यह महसूस किया गया कि केवल मुख्यमंत्री के राजधानी स्थित निवास पर जनदर्शन आतोजित करने के अलावा वर्ष में एक बार एक महीने का ग्राम सुराज अभियान चलाकर लोगों की दिककतो को हल करने का कारगर प्रयास करते रहे। बड़े जिलों की प्रशासनिक स्थिति को समझते हुए यह देखा गया कि ग्राम सुराज अभियान भी आम जनता की आवश्यकताओ का त्वरित समाधान करने में उतना कारगार साबित नही हो पा रहा, जितना राज्य के मुखिया चाहते थे. तभी से नए जिले बनाने की कवायद तेज होने लगी. ये नौ जिले राज्य की तरक्की को उस मंजिल तक पहुचाने में मददगार होंगे तथा छत्तीसगढ़ एक विकसित राज्य के रूप में स्थापित होने कि दिशा में अग्रसर होगा.
इन नौ नए जिलों में बलौदाबाजार, बालोद, बलरामपुर, बेमेतरा, गरियाबंद, मुंगेली, सूरजपुर, कोण्डागाव और सुकमा शामिल हैं. इस तरह अब राज्य में जिलों की संख्या 18 से बढ़कर 27 हो गयी है. इनमें से कुछ ऐसे जिले हैं जिनके अस्तित्व में आने के पूर्व उनके पुराने जिले की विषम भौगोलिक सरंचना तथा जिला मुख्यालय तक की लंबी दूरी को देखते हुए नौ जिलो का गठन इस लिहाज से जरुरी हो गया था. राज्य के बहुत से कुछ जिले नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने के कारण लोगों को अपने जिला मुख्यालय तक पहुंचना सभंव नही हो पाता था. नए जिले बनने से यह समस्या काफी हद तक हल हो जाएगी.
इस स्थिति को ध्यान में रखते हुये मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ने राज्य के सर्वांगीण विकास कि गति को और तेज करने के लिए 9 नये जिलों के गठन का निर्णय लिया। इससे जहाँ शासन प्रशासन और आम जनता एक-दूसरे के नजदीक आयेंगे, जनता और प्रशासन की बीच की दूरी कम होगी । इसका लाभ अंत में जनता को ही मिलेगा.
राज्य सरकार के इस ऐतिहासिक फैसले को अमलीजामा पहनाने के लिए राज्य मंत्रीमंडल से मंजूरी हासिल की गई और 1 जनवरी 2012 से 9 नये जिले अस्तित्व में लाने की अधिसूचना जारी की गई. सभी 9 जिले जनवरी 2012 से अपना प्रशासनिक कामकाज शुरू कर चुके हैं. इस प्रकार राज्य में अब जिलो की संख्या 18 से बढ़कर 27 हो गयी है. एक समय था जब यहॉ सिर्फ 7 जिले हुआ करते थे- रायपुर, राजनांदगांव, दुर्ग बस्तर, बिलासपुर, रायगढ़ और सरगुजा. तब यह छत्तीसगढ़ क्षेत्र अविभाजित मध्यप्रदेश का मात्र एक हिस्सा था. जब 6 जुलाई 1998 को मध्ययप्रदेश में 16 नये जिले बनाये गये तब उनमें से 9 नये जिले इसी अंचल के थें - जिनमें धमतरी, महासंमुद, कवर्धा, दंतेवाड़ा, कोरबा, कांकेर, जांजगीर -चांपा , जशपुर और कोरिया शामिल थे.
नये जिलों के गठन से पहले बहुत सी कठिनाईयां थी जिनके कारण जनता को अपने छोटे से कार्यों के लिए भी बहुत दूर तक नाना होता था. नये जिले अस्तित्व में आने से उन दिक्कतों का काफी हद तक समाधान हो जायेगा। जिस तरह से नए जिलों के लोकार्पण समारोह में जनता क़ा उत्साह उभर कर सामने आ रहा है, उससे यही प्रतीत होता है कि नए जिलों क़ा गठन स्थानीय जनता के लिए किसी त्योंहार से कम नही है.
कोई भी विकास तब तक अधूरा ही माना जायेगा, जब तक जनता उसमे शामिल न हो. इस लिहाज से नए जिले बनने क़ा फैसला छत्तीसगढ़ कि भावी तस्वीर को एक नई चमक और पहचान देने वाला साबित होगा. इस फैसले से ही भविष्य में विकास के नए रास्ते भी खुलेंगे.
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