मंगलवार, 17 जनवरी 2012

चुनौतियों के बीच बनती विकास की तस्वीर

-- विभाष कुमार झा

राज्य निर्माण के बाद से ही छत्तीसगढ़ ने अनेक क्षेत्रों में शानदार तरक्की की है. इस तरक्की में यहाँ की जनता क़ा योगदान सबसे अहम रहा है. राज्य की सरकारों ने भी अपने हिस्से क़ा कार्य बखूबी किया है. लेकिन अभी छत्तीसगढ़ को अपनी बहुत सी समस्याओं पर कामयाबी हासिल करना बाकी है. खास तौर पर नक्सल समस्या के कारण छत्तीसगढ़ अभी भी आदिवासी बहुल इलाकों में विकास के लिहाज से पिछड़ा हुआ है.
यह सच है कि इन ग्यारह वर्षों में आदिवासी इलाकों में भी विकास के बहुत से कार्य हुए हैं और अब पहले जैसी निराहजनक स्थिति नहीं है. फिर भी वहां और अधिक कार्य तेज गति से किये जाने कि जरुरत है.
राज्य की करीब सवा दो करोड़ आबादी के लिए खुशी और गर्व का विषय है कि छत्तीसगढ़ ने इन ग्यारह वर्षों में पिछडेपन की पहचान में उबरने की प्रबल इच्छा शक्ति दिखाई है. इस दौरान ''अमीर धरती के गरीब लोग'' के मिथक को तोड़ने के लिए समवेत एवं सार्थक प्रयास हुए हैं.
अंतर्राष्ट्रीय मानचित्र में मजबूती से उभरते भारत के साथ लोग अब छत्तीसगढ़ के विकास के प्रति रूचि प्रदर्षित कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ अब विकास की दौड़ में बहुत विकसित राज्यों के समकक्ष आकर खड़ा हो गया है. राज्य में एक ओर औद्योगिक विकास की गति में बढ़ोत्तरी हुई है, वहीं भरपूर कृषि उत्पादन ने किसानों की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान की है। सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जी.एस.डी.पी.) दर में 11.57 प्रतिशत की उपलब्धि अर्जित कर यह राज्य देश में एक विशेष स्थान हासिल कर चुका है , वहीं धान उत्पादन के क्षेत्र में प्रथम राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त करना भी विकास के दावे को मजबूत करता है.
इस नए राज्य ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली, सूचना प्रौद्योगिकी, अधोसंरचना विकास सहित शिक्षा, स्वास्थ्य एवं रोजगार के क्षेत्र में विकास के नए कीर्तिमान स्थापित किये हैं। विकास के इस दौड़ में अनेक बाधाऐं एवं चुनौतियाँ भी सामने है। विरासत में प्राप्त नक्सली समस्या सहित कुछ अन्य समस्याएं भी है। बिजली के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ आत्मनिर्भर होने लगा है. विकास क़ा एक और सुखद पहलू यह है कि छत्तीसगढ़ औद्योगिक, कृषि एवं घरेलू उपयोग के लिए चौबीस घंटे बिजली देने वाला देश का पहला राज्य है। प्रदेश में नए औद्योगिक केंद्रो की स्थापना के कारण स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर तेजी से मिल रहे हैं.
प्रदेश ने औद्योगिक उत्पादन के साथ-साथ कृषि उत्पादन में भी शीर्ष प्रगति की है। किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलने के लिए धान खरीदी की पारदर्शी व्यवस्था की गई है। राज्य की बुनियादी संरचना में तेज गति से विकास हुआ है. साथ ही सड़कों एवं सिंचाई योजना के क्षेत्र में उल्लेखनीय तरक्की हुई है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में स्मार्टकार्ड योजना, बाल हृदय सुरक्षा तथा बाल श्रवण योजना लागू होने से गरीब परिवारों को बेहतर ईलाज की सुविधा मिलने लगी है.
जहाँ तक छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी समस्या क़ा सवाल है तो इसमें नक्सली समस्या ही सबसे ऊपर है- यह सभी जानते हैं. सरकार इसके समाधान के लिए जो भी प्रयास कर रही है, उसमे स्थानीय आदिवासी परिवारों क़ा विश्वास हासिल करना सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए. इसके बिना कोई भी सरकारी प्रयास प्रभावशाली नहीं हो पायेगा. अभी तक के आंकड़ों के अनुसार नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में रोजगार मूलक बहुत सी विकास योजनाए लागू की गई है। शिक्षा और स्वास्थ्य सम्बन्धी कार्यक्रमों तथा सार्वजनिक वितरण प्रणाली को दुरूस्त करने का प्रयास किया गया है।
सरकार के लिए प्रदेश में बढ़ती शराबखोरी भी एक अहम समस्या है. मिफ्त अनाज दिए जाने सम्बन्धी योजना का नकारात्मक प्रभाव शराबखोरी के रूप में मजदूरों और किसानों पर प्रायः हर इलाके में देखा जा रहा था। राज्य सरकार ने समय रहते इन समस्याओं के प्रति तुरंत कदम उठाते हुए किसानों तथा श्रमिकों को शराब की लत से मुक्त रखने के लिए आबकारी नीति में क्रांतिकारी बदलाव लाया है. इसी क़ा नतीजा है कि प्रदेश के 2000 तक कि आबादी वाले गांवों के लगभग ढाई सौ शराब दुकानों को बंद किया गया है। इस वर्ष यह सीमा 3000 आबादी वाले गांवों में भी लागु कर दी गई है. जाहिर है इस निर्णय के कारण ही इस वश आबकारी के राजस्व में कमी आई है, जो कि राज्य के समग्र विकास के लिए एक अच्छा संकेत है.
विकास की इस तस्वीर को देखकर कोई भी छत्तीसगढ़ की उपलब्धियों पर गर्व ही करेगा. हालाँकि किसी भी नए राज्य के लिए एक दशक क़ा समय बहुत अधिक नहीं होता. खास तौर पर तब, जबकि यहाँ नक्सली समस्या विकराल रूप ले चुकी है. इसके बावजूद छत्तीसगढ़ ने विभिन्न क्षेत्रों में जो तरक्की की है, वह प्रेरक है- इसमें कोई दो राय नहीं.
----

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें